Hindi Inspirational Poem on Zindagi

गरीब दूर तक चलता है
खाना खाने के लिए।
अमीर मीलों चलता है
खाना पचाने के लिए।
किसी के पास खाने के लिए
एक वक्त की रोटी नहीं है
किसी के पास खाने के लिए
वक्त नहीं है।
कोई लाचार है
इसलिए बीमार है।
कोई बीमार है
इसलिए लाचार है।
कोई अपनों के लिए
रोटी छोड़ देता है।
कोई रोटी के लिए
अपनों को छोड़ देते है।
ये दुनिया भी कितनी निराळी है।
कभी वक्त मिले तो सोचना
कभी छोटी सी चोट लगने पर रोते थे
आज दिल टूट जाने पर भी संभल जाते है।
पहले हम दोस्तों के साथ रहते थे
आज दोस्तों की यादों में रहते है।
पहले लड़ना मनाना रोज का काम था
आज एक बार लड़ते है, तो रिश्ते खो जाते है।
सच में जिन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया,
जाने कब हमकों इतना बड़ा बना दिया।

Pyaari si WhatsApp Poem in Hindi

जोड़ दिये सब टूटे रिश्ते,
बरसों पहले छूटे रिश्ते !
फ़ैमिली को परिवार कर दिया,
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !!

स्कूल के सब यार मिल गए,
यादों के अंबार मिल गए!
खुशियों भरा संसार कर दिया,
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !!

सेंस ऑफ़ ह्यूमर तेज हो गया,
भोंदू भी अंग्रेज हो गया !
कॉपी पेस्ट का जाल कर दिया,
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !!

पांचवी फ़ेल भी लॉयर बन गया,
हर कोई क्रिकेट अंपायर बन गया !
संसद सा माहौल कर दिया,
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !

बीवी फोन में बिजी हो गई,
पति भी इसमें कहीं खो गए,
लड़ना-झगड़ना बंद कर दिया
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया

Bachpan Ki Kahaani – Hindi Poem

बचपन की कहानी याद नहीं..!
बातें वो पुरानी याद नहीं..!!
माँ के आँचल का इल्म तो है..!
पर वो नींद रूहानी याद नहीं..!!

छोटी सी बात पे लड़ते थे..!
झूलों पर गिर गिर चढ़ते थे…!!
किसी चोट के अब भी निशाँ तो हैं..!
पर वो चोट पुरानी याद नहीं..!!

ढेरों बच्चे जब आँगन में..!
था शोर-शराबा आँगन में..!!
माँ ने डांटा था चिल्लाकर..!
वो डांट जबानी याद नहीं..!!

कितने किस्से थे दादी के..!
हाथों से खाना दादी के..!!
लाखों नखरे..कितना गुस्सा..!!
वो शर्त पुरानी याद नहीं..!!

पापा से डर जब लगता था..!
उन्हें दूर से देख के भगता था..!!
उस दिन क्यूँ पड़ी थे मार मुझे..!
उस दिन की कहानी याद नहीं..!!

वो बचपन भी क्या दिन थे मेरे..!
न फ़िक्र कोई..न दर्द कोई..!!
बस खेलो, खाओ, सो जाओ..!
बस इसके सिवा कुछ याद नहीं..!

बचपन की कहानी याद नहीं..!
बातें वो पुरानी याद नहीं…!!

Heart touching poem on Happy Father’s Day

जब मम्मी डाँट रहीं थी
तो
कोई चुपके से हँसा रहा था,
वो थे पापा. . .

जब मैं सो रहा था
तब कोई चुपके से
सिर पर हाथ फिरा रहा था ,
वो थे पापा. . .

जब मैं सुबह उठा तो
कोई बहुत थक कर भी
काम पर जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

खुद कड़ी धूप में रह कर
कोई मुझे ए.सी. में
सुला रहा था,
वो थे पापा. . .

सपने तो मेरे थे
पर उन्हें पूरा करने का
रास्ता कोई और बताऐ
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

मैं तो सिर्फ अपनी खुशियों में
हँसता हूँ,
पर मेरी हँसी देख कर
कोई अपने गम
भुलाऐ जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

फल खाने की
ज्यादा जरूरत तो उन्हें थी,
पर कोई मुझे सेब खिलाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

खुश तो मुझे होना चाहिए
कि वो मुझे मिले ,
पर मेरे जन्म लेने की
खुशी कोई और मनाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

ये दुनिया पैसों से चलती है
पर कोई सिर्फ मेरे लिए
पैसे कमाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

घर में सब अपना प्यार दिखाते हैं
पर कोई बिना दिखाऐ भी
इतना प्यार किए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

पेड़ तो अपना फल
खा नही सकते
इसलिए हमें देते हैं…
पर कोई अपना पेट
खाली रखकर भी मेरा पेट
भरे जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

मैं तो नौकरी के लिए
घर से बाहर जाने पर दुखी था
पर मुझसे भी अधिक आंसू
कोई और बहाए
जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

मैं अपने “बेटा” शब्द को
सार्थक बना सका या नही..
पता नहीं…
पर कोई बिना स्वार्थ के
अपने “पिता” शब्द को
सार्थक बनाए
जा रहा था ,
वो थे पापा!

I Love you Papa..
Happy Father’s Day