Love poem in Hindi on Adhuri Mohabbat

अधूरी मोहब्बत निभाना आखिर किसे नहीं आया?
बताना मुझे नहीं आया, तो जताना उसे नहीं आया।

यूँ तो बिछाए हर तरफ जाल ही जाल थे मोहब्बत के
फसाना मुझे नहीं आया तो छुडाना उसे नहीं आया।

चुप्पी में भी जज्बातों की शिकायत बखूबी हुई लेकिन
सताना मुझे नहीं आया तो मनाना उसे नहीं आया।

अपनी अपनी जिंदगी के बस अपने अपने लम्हे
हँसाना मुझे नहीं आया तो रुलाना उसे नहीं आया।

Poem in Hindi By Harivansh Rai Bachchan

मकान चाहे कच्चे थे
लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे…

चारपाई पर बैठते थे
पास पास रहते थे…

सोफे और डबल बेड आ गए
दूरियां हमारी बढा गए…

छतों पर अब न सोते हैं
बात बतंगड अब न होते हैं…

आंगन में वृक्ष थे
सांझे सुख दुख थे…

दरवाजा खुला रहता था
राही भी आ बैठता था…

कौवे भी कांवते थे
मेहमान आते जाते थे…

इक साइकिल ही पास था
फिर भी मेल जोल था…

रिश्ते निभाते थे
रूठते मनाते थे…

पैसा चाहे कम था
माथे पे ना गम था…

मकान चाहे कच्चे थे
रिश्ते सारे सच्चे थे…

अब शायद कुछ पा लिया है,
पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया…

जीवन की भाग-दौड़ में –
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है?

हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी,
आम हो जाती है।

एक सवेरा था,
जब हँस कर उठते थे हम…

और

आज कई बार,
बिना मुस्कुराये ही
शाम हो जाती है!!

कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते…

खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते…

Hindi Inspirational Poem on Zindagi

गरीब दूर तक चलता है
खाना खाने के लिए।
अमीर मीलों चलता है
खाना पचाने के लिए।
किसी के पास खाने के लिए
एक वक्त की रोटी नहीं है
किसी के पास खाने के लिए
वक्त नहीं है।
कोई लाचार है
इसलिए बीमार है।
कोई बीमार है
इसलिए लाचार है।
कोई अपनों के लिए
रोटी छोड़ देता है।
कोई रोटी के लिए
अपनों को छोड़ देते है।
ये दुनिया भी कितनी निराळी है।
कभी वक्त मिले तो सोचना
कभी छोटी सी चोट लगने पर रोते थे
आज दिल टूट जाने पर भी संभल जाते है।
पहले हम दोस्तों के साथ रहते थे
आज दोस्तों की यादों में रहते है।
पहले लड़ना मनाना रोज का काम था
आज एक बार लड़ते है, तो रिश्ते खो जाते है।
सच में जिन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया,
जाने कब हमकों इतना बड़ा बना दिया।

Pyaari si WhatsApp Poem in Hindi

जोड़ दिये सब टूटे रिश्ते,
बरसों पहले छूटे रिश्ते !
फ़ैमिली को परिवार कर दिया,
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !!

स्कूल के सब यार मिल गए,
यादों के अंबार मिल गए!
खुशियों भरा संसार कर दिया,
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !!

सेंस ऑफ़ ह्यूमर तेज हो गया,
भोंदू भी अंग्रेज हो गया !
कॉपी पेस्ट का जाल कर दिया,
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !!

पांचवी फ़ेल भी लॉयर बन गया,
हर कोई क्रिकेट अंपायर बन गया !
संसद सा माहौल कर दिया,
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया !

बीवी फोन में बिजी हो गई,
पति भी इसमें कहीं खो गए,
लड़ना-झगड़ना बंद कर दिया
“WhatsApp” ने कमाल कर दिया

Bachpan Ki Kahaani – Hindi Poem

बचपन की कहानी याद नहीं..!
बातें वो पुरानी याद नहीं..!!
माँ के आँचल का इल्म तो है..!
पर वो नींद रूहानी याद नहीं..!!

छोटी सी बात पे लड़ते थे..!
झूलों पर गिर गिर चढ़ते थे…!!
किसी चोट के अब भी निशाँ तो हैं..!
पर वो चोट पुरानी याद नहीं..!!

ढेरों बच्चे जब आँगन में..!
था शोर-शराबा आँगन में..!!
माँ ने डांटा था चिल्लाकर..!
वो डांट जबानी याद नहीं..!!

कितने किस्से थे दादी के..!
हाथों से खाना दादी के..!!
लाखों नखरे..कितना गुस्सा..!!
वो शर्त पुरानी याद नहीं..!!

पापा से डर जब लगता था..!
उन्हें दूर से देख के भगता था..!!
उस दिन क्यूँ पड़ी थे मार मुझे..!
उस दिन की कहानी याद नहीं..!!

वो बचपन भी क्या दिन थे मेरे..!
न फ़िक्र कोई..न दर्द कोई..!!
बस खेलो, खाओ, सो जाओ..!
बस इसके सिवा कुछ याद नहीं..!

बचपन की कहानी याद नहीं..!
बातें वो पुरानी याद नहीं…!!