Hindi Poem on Humse Hain Ruthe Vo

वो रूठे है इस कदर, मनाये कैसे,
जज्बात अपने दिल के दिखाए कैसे,
नर्म एहसासों की सिहरन कह रही पास आ जाओ,
सिमट जाओ मुझमें और दिल में समां जाओ..

देखो लौट आओ और ना रूठो हमसे,
बस रह गया है तुम्हारा इन्तेजार कब से,
इतनी भी क्या तकरार हमसे,
इन्तेजार में तेरे दिल बेक़रार कब से..

तुम लड़ना मुझसे, झगड़ना मुझसे,
पर कभी ना दूर रहना मुझसे,
देखो वो सूरज डूब रहा चांदनी लाकर,
फिर ढलती शाम में बढ़ रहा खुमार कब से..

मेरे दिल की ख़ामोशी मेरी वफायें समझों ,
अब क्या कहूँ अपने दिल की सदायें समझों,
वो रूठे है इस कदर , मनाये कैसे,
जज्बात अपने दिल के दिखाए कैसे..

Love Poem in Hindi on Sukhe Patte Ki Tarah

जिस तरह बे मौसम बारिश सूखे पत्तों पे आवाज़ करती है,
तुम आजकल बिन बोले मुझसे इस तरह बात करती हो,
ना पता है तुमको मेरी परेशानी का ना ही मेरे दिल की हालत का,
मैं ऐसा क्यों हो रहा हूँ यह सवाल भी नहीं करती हो,
तुम्हें फ़िक्र रह गयी है अपनी और शायद सिर्फ़ अपनी,
क्यों नहीं इस रिश्ते से निकल कर पहली सी मुलाक़ात करती हो,
बहुत दिन हो गये मुझको दोपहर की नींद से जगाए,
क्यों नहीं मेरे कानो में आकर कोई शरारत वाली बात करती हो,
एक वक़्त था जब हम तुम थे सुख दुख के साथी,
क्यों नहीं तुम मुझको समझा कर एक नयी शुरुआत करती हो,
सूखे पत्तों की खरखराहट सी तुम मुझसे बात करती हो,
मैं बहुत उदास हो जाता हूँ जब तुम मुझसे इस तरह बात करती हो..

Hindi Poem – Jeene Ke Liye Waqt Nahi

हर ख़ुशी है लोंगों के दामन में ,
पर एक हंसी के लिये वक़्त नहीं .
दिन रात दौड़ती दुनिया में ,
ज़िन्दगी के लिये ही वक़्त नहीं .

सारे रिश्तों को तो हम मार चुके,
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं ..
सारे नाम मोबाइल में हैं ,
पर दोस्ती के लिये वक़्त नहीं .

गैरों की क्या बात करें ,
जब अपनों के लिये ही वक़्त नहीं .
आखों में है नींद भरी ,
पर सोने का वक़्त नहीं .

दिल है ग़मो से भरा हुआ ,
पर रोने का भी वक़्त नहीं .
पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े,
की थकने का भी वक़्त नहीं .

पराये एहसानों की क्या कद्र करें ,
जब अपने सपनों के लिये ही वक़्त नहीं
तू ही बता ऐ ज़िन्दगी ,
इस ज़िन्दगी का क्या होगा,
की हर पल मरने वालों को ,
जीने के लिये भी वक़्त नहीं..

Dard Poem In Hindi on Dil Ki Fariyaad

जो भी दुनिया में मुहब्बत पे जाँनिसार करे
ऐसे दीवाने से आखिर क्यूँ कोई प्यार करे

रेत प्यासा सा तड़पता है हर साहिल पे
कितनी सदियों से वो लहरों का इंतजार करे

बाँटते रहते हैं वफा वो कई किश्तों में
बेवफाई का यहाँ जो भी कारोबार करे

चाहता हूँ, तेरे दामन का किनारा तो मिले
दिल भी आख़िर ये फरियाद कितनी बार करे

Hindi Poem on Kuch Ruthe Se Lagte Ho

कुछ कुछ रूठे से, लगते हो,
शायद अंदर तक टूटे लगते हो ॥

बिखरे टुकड़ो की आहट सुनी है मैंने
ये किसके हाथों से छूटे लगते हो ॥

नम आँखें सब बयाँ, कर रही है,
अपनों के हाथों से लूटे लगते हो ॥

जोड़ दूँ ज़रा क़रीब आओ तुम मेरे
तुम जहाँ जहाँ से, टूटे लगते हो ॥

मुस्कुराकर ग़म अपना छुपा रहे हो
मेरी तरह तुम भी झूठे लगते हो ॥

आओ तुम्हें इक नाम मैं दे दूँ,
तुम गुलमोहर के बूटे लगते हो ॥