Zindagi Shayari on Bekasur the Hum

जीना चाहा तो जिंदगी से दूर थे हम
मरना चाहा तो जीने को मजबूर थे हम
सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा
बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम।

One thought on “Zindagi Shayari on Bekasur the Hum”

  1. बहुत कातिल अंदाज है खुद की बेगुनाही साबित करने का…

    “सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा
    बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम…”

    बिंदास 🙂

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