Poem in Hindi on Koi Shikwa Nahi Koi Gila Nahi

अब ना कोई शिकवा ना कोई गिला ना कोई मलाल रहा,
सितम तेरे भी बे-हिसाब रहे सबर मेरा भी कमाल रहा,
हम वही हैं,बस ज़रा ठिकाना बदल लिया है,
तेरे दिल से निकलकर अब ख़ुद में रहते हैं,
शिकायत खुद से भी है….और….खुदा से भी है,
जो मिला वो मुझे मंजुर नहीं… जिसे चाहा वो हासिल नहीं ..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *