Two Line Shayari on Sardi Ka Mausam

1. मत ढूढ़ना मुझे इस जहाँ की तन्हाई में,
ठण्ड बहुत हैं मैं हूँ अपनी रजाई में.

2. जाड़े की रुत है नई तन पर नीली शाल
तेरे साथ अच्छी लगी सर्दी अब के साल.

3. समझ में नही आता, सारी रात गुजर जाती हैं,
रजाई में हवा किधर से घुस जाती हैं.

4. ठण्ड में वादा नही करते कि दोस्ती निभायेंगे,
जरूरत पड़ी तो सब कुछ ले लो, पर रजाई न दे पायेंगे.

5. बड़ी बेवफ़ा हो जाती है , ये घड़ी भी सर्दियों में,
5 मिनट और सोने की सोचो तो, 30 मिनट आगे बढ़ जाती है.

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