Zindagi Shayari in Hindi on Paisa Ko Apna Samajh Baithe

हम तो वरदान को ही शाप समझ बैठे है,
सामने पूण्य है और हम पाप समझ बैठे है,
पहले माँ-बाप को ही दौलत समझते थे हम,
अफसोस अब दौलत को ही माँ-बाप समझ बैठे है..

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