Hindi Shayari in Zindagi Ke Karz

ख़ुशियों की ख़ातिर हमने कितने क़र्ज़ उतार रक्खे हैं,,
ज़िंदगी फिर भी तूने हमपे कितने दर्द उतार रक्खे हैं
मासूम अगर होता तो सब मिलके लूट लेते ,
जाने किस अपने ने मेरे दुश्मन उतार रक्खे हैं..

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